Tuesday, May 5, 2009

Zindgi ke sahi mayane....

4 comments:

neha said...

bahut badiya rajat ji........

pragya said...

wah khubsurat hai

AlbelaKhatri.com said...

zindgi k mayane talash karti aur is talash me zindgi ka har rang dikhati aapki kavita jitni achhi ban padi hai,utna hi achha iska back ground bhi hai......BADHAI

JHAROKHA said...

रजत जी ,
बहुत भावपूर्ण एवं संवेदनशील रचना है आपकी .बधाई .लेकिन कहीं कहीं भाषा और टाइपिंग की गलतियाँ हैं उन्हें सुधIर लें .जैसे ...
धरती की प्यास बुझ गया ..गलत है इसकी जगह ..धरती की प्यास बुझ गयी ..होना चाहिए .
आशा है अन्यथा नहीं लेंगे .