Monday, December 28, 2009

कमीने...

17 comments:

Ashish (Ashu) said...

बहुत ही उम्दा कविता है लाजवाब है

ललित शर्मा said...

कुछ कमीने चाल चल चुके है अब मेरी है बारी

बहुत सुंदर। शह और मात के खेल मे सब जायज है।

अच्छा लगा पढ कर्। आभार

Suman said...

nice

महफूज़ अली said...

बहुत ही उम्दा कविता .....

AlbelaKhatri.com said...

waah rajat ji !

darpan dikhaa diya aapne

bahut khoob !

sundar aur maarmik kavita....

chitra ka upyog kamaal kar raha hai

dhnyavad !

Dr. RAMJI GIRI said...

सराहनीय प्रयास यथार्थ को उभारने का..

aarya said...

सादर वन्दे
इतनी सच्चाई इतने कम शब्दों में, कमाल है जी
रत्नेश त्रिपाठी

anitakumar said...

बहुत बढ़िया लिखा है

Udan Tashtari said...

आनन्द आया आपकी रचना पढ़कर.


यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

प्रसून दीक्षित 'अंकुर' said...

अत्यंत खूब ! जितनी सराहना की जाये उतनी कम !

Dhiraj Shah said...

दुनियाँ है अजायबधर यहाँ है भाँति भाँति के लोग ,यहाँ इन्सान एक दुसरे को काट रहा है।

सुन्दर कविता..

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना!!

हरकीरत ' हीर' said...

क्या बात है नरूला जी ....ये अंगारों से दहकते लफ्ज़ ......कोई राज़ है क्या .....??

Prerna said...

kya baat hai..jaise ek ek shabd seedha dil se nikla hua hai...

Dimps said...

Hello Rajat,

Happy New year!
By the way, you creation is quite to the point :) revengeful...
And hats off to the truth you have boldly picturised.

Regards,
Dimple

Scorpion King said...

Zindagi zindagi na rahi khel ho chali hai ab, jaayaz aur naajaayaz ke sawal ab nahi hote, bas mukaam haasil kar lo to sab kuchh jaayaz ho jayega, bas isi khel mein sab hain.

Beautiful line "ki ab meri baari hai".

Josefina said...

愛情不是慈善事業,不能隨便施捨。.........................