Sunday, August 15, 2010

Anmol Azaadi...


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12 comments:

ललित शर्मा-للت شرما said...

जो शहीद हुए आजादी के लिए
उनकी आत्मा रोती है
जो देश का है असली अधिकारी
उसके तन पे लंगोटी है
रोटी कपड़ा और मकान का
नारा तो अब बेमानी हुआ
लोकतंत्र के राजा वजीरो की
लुच्चे-टुच्चों के हाथ गोटी है


विचारोत्ते्जक लेख के लिए आभार
स्वतंत्रता दिवस की बधाई

शेरघाटी said...

क्या बात है ! बहुत खूब !

अंग्रेजों से हासिल मुक्ति-पर्व मुबारक हो !
समय हो तो अवश्य पढ़ें :

आज शहीदों ने तुमको अहले वतन ललकारा : अज़ीमउल्लाह ख़ान जिन्होंने पहला झंडा गीत लिखा http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_14.html

शहरोज़

arun c roy said...

rajat bahut dino baad tumhari koi kavita aayee hai.. timhari kavita ka intjaar tha.. kyonki naa kewal tumhare shabd achhe hote hain balki tumhara graphic presentation, use aur bhi aakarshak banata hai... sahi samay par tumhari rachna aayee hai.. sunder kavita hai..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

bahut sundar ....kavita bhi aur aapka pesh karne ka tareeka bhi

अनामिका की सदायें ...... said...

बहुत सुंदर प्रेसेंन्तेशन है..आपसे सीखना चाहती हूँ.

soni garg said...

भ्रष्ट राजनेता अपने बाप की जागीर मान बैठे है हर प्रदेश को ! अब इस भ्रम से ही तो उन्हें बाहर निकलना है ! अच्छी कविता लिखी है आपने और मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया !

राजेश उत्‍साही said...

अच्‍छा लगा आपके ब्‍लाग पर आकर।

Parul said...

sacchi shradhanjali!

Shekhar Suman said...

bahut hi sundar rachna,...
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मेरे ब्लॉग पर इस मौसम में भी पतझड़ ..
जरूर आएँ..

Shekhar Suman said...

बहुत दिन हुए आपका कुछ पढने को नहीं मिला

मेरे ब्लॉग पर मेरी नयी कविता संघर्ष

Sonal said...

bahut sundar....
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Anonymous said...

ANMOL AAZAADI

I am impressed........
superb

--Chaitali